फिर सोने की चिड़िया कहलाएगा .. गणतंत्र दिवस की बेला पर मिलकर नारा बुलंद करो | अखंड रखेंगे सीमाओं को, अनुसरण करेंगे और चलेंगे, राष्ट्र पिता के वचनो पर | कभी अविचल, और अडिग थी, संस्कृति, आदर्श और विचारधारा हमारी | तरस रही है जीवन को, खोखली दिन प्रति दिन, अब वो हो रही...
