बहिखाता कुछ फ़ुर्सत के पलों में आज, यादों के पन्नो को पलट रहा था | क्या मिला और क्या छूटा अब तक, शायद हिसाब लगा रहा था | शुरुआती पन्ने कुछ गल से गये थे, लिखा साफ दिख रहा नही था | धुंधले से कई शब्द दिखे थे, बचपन समेटे कुछ लिखा हुआ था...
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